यह बहुत प्राचीन मंदिर है, रुद्रेश्वर धाम हनुमान जी का यह पवित्र मंदिर रेहटी तहसील मुख्यालय के पास बायां गाँव में पहाड़ी पर है, यह भोपाल से 70 किमी की दुरी पर स्थित है।
यह बहुत प्राचीन मंदिर है, विंध्यवासनी बीजासन देवी का यह पवित्र सिद्धपीठ देवी “दुर्गा” रेहटी तहसील मुख्यालय के पास सलकनपुर गाँव में एक 800 फुट ऊँची पहाड़ी पर है, यह भोपाल से 70 किमी की दुरी पर स्थित है। प्रत्येक नवरात्री को यहाँ मेला आयोजित किया जाता है । मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल मार्ग , तथा सीढ़ियां मार्ग भी है जिसमे 1000 से ज्यादा सीढ़ियां हैं। यहाँ रोपवे की सुविधा भी नागरिको के लिए उपलब्ध है। वर्तमान में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। इसका रख रखाव सलकनपुर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है ।
जिला मुख्यालय से 110 किलोमीटर दूर और प्रदेश की राजधानी भोपाल से महज 80 किलोमीटर दूर बुधनी विधानसभा क्षेत्र में भगवान भोलेनाथ का एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां भोलेनाथ का अभिषेक अपने आप गुफा से टपकते पानी से होता है. यही वजह है कि इस मंदिर को टपकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है. रेहटी तहसील में स्थित भगवान भोलेनाथ के इस मंदिर में साल के बारहों महीने प्रकृति ही अभिषेक करती है. यहां आने वाले नकटीतलाई गांव से करीब 6 किलोमीटर दूर विध्यांचल पर्वत की पहाड़ियों पर स्थित है. टपकेश्वर महादेव मंदिर जाने के लिए भक्तों को दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर जाना पड़ता है.
मेकल पर्वता से मेकलसुता नाम पड़ा: नर्मदा की जब उत्पत्ति हुई तब मां नर्मदा का आवेग इतना था कि कोई पर्वत उनके आवेग को नहीं झेल रहा था। तब विंध्यपुत्र मेकल ने आवेग को अपने ऊपर धारण किया। इसलिए नर्मदा का नाम मेकलसुता भी है। नर्मदापुरम जिले में नर्मदा बनखेड़ी के उमरधा से सिवनीमालवा के रामगढ़ गांव तक 120 किमी में प्रवाह होती है। नर्मदा की होती है परिक्रमा: सभी नदियों में सिर्फ नर्मदा ही ऐसी हैं जिनकी परिक्रमा की जाती है। अन्य किसी भी नदी की परिकमा नहीं होती है। अमरंकटक से गुजरात तक 1312 किमी में नर्मदा बहती है। मप्र में नर्मदा 1077 किमी बहती है। नर्मदा की 41 मुख्य सहायक नदियां हैं। इसमें सबसे लंबी प्रवाह वाली नदी हिरन नदी और तवा नदी मप्र मंं ही है